Sunday, April 14, 2024
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New Tax Regime :- भारत में शुरू होगी इनकम टैक्स की नयी व्यवस्था

New Tax Regime: सरकार ने 2020 के बजट में income Tax की एक नई व्यवस्था (New tax regime) पेश की थी। इसे New Income Tax Regime कहा जाता है। इसमें Tax डिडक्शन और एग्जेम्प्शन हटा दिया गया है। लेकिन, Tax की दर काफी घटा दी गई है। हालांकि, Tax payers ने इस व्यवस्था में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है। लेकिन, प्रख्यात अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय (Bibek Debroy) का मानना है कि यही (New Tax Regime) इंडिया में डायरेक्ट टैक्स का फ्यूचर है। रॉय Minister’s Economic Advisory Council (PMEAC) के चेयरमैन भी हैं।

इस हफ्ते की शुरुआत में दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में रॉय ने कहा, “हमें आगे जाकर यह मानना पड़ेगा कि हमारे लिए ऐसा Tax सिस्टम जरूरी है, जिसमें किसी तरह का एग्जेम्प्शन नहीं होगा।” New Tax Regime को आए दो साल हो गए हैं, लेकिन अब भी ज्यादातर टैक्सपेयर्स टैक्स की पुरानी व्यवस्था का पालन कर रहे हैं।

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अगर पुरानी टैक्स की व्यवस्था की बात करें तो सेक्शन 80सी, 80सीसी1बी, 80डी और 24बी, स्टैंडर्ड डिडक्शन और कुछ दूसरे बेनेफिट का लाभ उठाने पर सालाना 9-10 लाख रुपये इनकम वाले टैक्सपेयर को किसी तरह का टैक्स नहीं चुकाना पड़ता है। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार न्यू टैक्स रीजीम का इस्तेमाल बढ़ाना चाहती है तो उसे टैक्स की पुरानी व्यवस्था को खत्म करना होगा या उसके तहत मिलने वाली छूट घटानी पड़ेगी।

देबरॉय ने कहा कि टैक्सपेयर्स एग्जेम्पशन छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इस वजह से टैक्स सिस्टम को आसान बनाने में दिक्कत आ रही है। ज्यादा डिडक्शंस और एग्जेम्प्शन के कई नुकसान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर, गुड्स एंड सर्विसेज ऑफर करने और दूसरे कामों के लिए पैसे चाहिए। अपनी दलील के पक्ष में एक अहम डेटा पेश करते हुए उन्होंने कहा कि जीडीपी में अभी टैक्स कलेक्शन की सिर्फ 15% हिस्सेदारी है। इससे साफ हो जाता है कि लोगों को टैक्स चुकाना पड़ेगा।

PMEAC के चेयरमैन ने कहा कि उन्होंने डायरेक्ट टैक्स के बारे में जो बातें बताई हैं, वे उनके व्यक्तिगत विचार हैं। इसे पीएमईएसी की सिफारिशें नहीं मानी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हमें तरक्की के रास्ते पर चलना है तो इसके लिए हमें डायरेक्ट टैक्स पर फोकस करना होगा न कि इनडायरेक्ट टैक्स पर। उन्होंने कहा कि डिडक्शन और एग्जेम्प्शन के चलते हर साल जीडीपी का करीब 5-5.5 फीसदी रेवेन्यू लॉस होता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या इन एग्जेम्पशन को जारी रखा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि डायरेक्ट टैक्स के मोर्चे पर सुधार आया है। उदाहरण के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले लोगों की संख्या नाटकीय रूप से बढ़ी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के डेटा के मुताबिक, 8 अक्टूबर तक डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन पिछले साल के इसी अवधि के मुकाबले 23.8 % बढ़कर 8.98 लाख करोड़ रुपये रहा।

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12 COMMENTS

    • They should pay tax at par with any other citizen…..
      In fact they are social workers and there should be no salary..
      Only reimbursement of actual expenses they incur for attending Parliament etc..
      They are spending huge.. Very huge amount for their election.. So they are wealthy and need no salary…

    • I fully agree .
      Every MP or MLA or any minister including PM and President should pay Income tax on every penny they get in cash or in perquisites /kind as is applicable to any citizen of the country and even there pension should be stopped unless they serve the country for atleast 30 years in office as MLA or MP in Vidhan Sabha or Lok Sabha without a break.

  1. No one talking about reduction of pension of MP Mla only they want more tax from public if they reduce pension given and facilities to MP mla no required to more tax collect from public

  2. Middle class ko choose ke fek do. Saas lene pe bhi tax lagna chahiye govt ko ensure karna chahiye ki kahin kisi ka paas paisa Bach to nahi raha hai.

  3. Why only 2 percent of Indians have to pay for the rest of the 98 percent? Deductions kam karne ki nahi, zyada logo ko tax slab me laane ki zaroorat hai. Isse kisne economist banaya hai re?

  4. Why do the hit is always on the Salaried people, Middle Class and The corporate class? A simple Tea vender is earning more than the normal IT guys is earning but they are not paying single ₹ as tax

  5. Why do the hit is always on the Salaried people, Middle Class and The corporate class? A simple Tea vender is earning more than the normal IT guys is earning but they are not paying single ₹ as tax

  6. नई टैक्स प्रणाली से फायदा और नुकसान दोनों है GDP, Consumption इत्यादि में बढ़ोतरी होगी। दूसरी ओर लोगों में लघु बचत की आदतों में कमी आएगी। बीमा कम्पनियां प्रभावित होंगी। अतः ये सभी भी बरकरार रहे इसके लिए भी कोई रास्ता निकालने होंगे। इसमें कोई शक नहीं कि spending बढ़ने से देश में बहुमुखी विकास की रफ्तार में तेजी आएगी। लेकिन लोगों के बचत और सामाजिक सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा।

  7. People earning less than 8 lakhs are considered EWS. Then why not raise the exemption limit to that amount? We don’t have to resort to saving compulsorily.

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