Monday, February 26, 2024
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Google को मिलने जा रही है अब इन कंपनियों से टक्कर, CCI के आदेश से बदल जायेगा भारतीय बाजार

हाल के वर्षों में दुनिया भर में एंटीट्रस्ट वाचडॉग बड़ी टेक कंपनियों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन भारत कम से कम कॉम्पीटिशन रेगुलेशन के मामले में सुरक्षित बना हुआ था। गुरुवार को इस स्थिति में बदलाव की उम्मीद जगी, जब कॉम्पीटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने एंड्रॉयड इकोसिस्टम में अपने दबदबे के दुरुपयोग पर गूगल (Google) पर 1,338 करोड़ रुपये (16.2 करोड़ डॉलर) का जुर्माना लगाया है।

वास्तव में, 1 लाख करोड़ डॉलर वैल्यू वाली कंपनी के लिए यह बड़ी रकम नहीं है, जिसने वित्त वर्ष 22 में भारतीय बाजार से इस पेनाल्टी से 10 गुना रेवेन्यू कमाया है। आइए, सीसीआई के दिशानिर्देशों के गूगल के लिए मायने समझते हैं। भारत के एंटीट्रस्ट रेगुलेटर ने इस फैसले के जरिये गूगल के भारत में 60 करोड़ यूजर्स के स्मार्टफोन मार्केट में Android की 96 फीसदी मार्केट शेयर सुरक्षित करने के खेल को झटका दिया है।

कब शुरू हुआ था मामला

सीसीआई ने अप्रैल 2019 में देश में एंड्रॉयड आधारित स्मार्टफोन के यूजर्स की तरफ से शिकायतें आने के बाद मामले की व्यापक जांच का आदेश दिया था। Google पर एप्लिकेशन डिस्ट्रीब्यूशन एग्रीमेंट (MDA) और एंटी फ्रैगमेंटेशन एग्रीमेंट (AFA) जैसे दो समझौतों में गलत कारोबारी गतिविधियां अपनाने का आरोप लगाया गया था। एंड्रॉयड दरअसल स्मार्टफोन और टैबलेट के ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEM) की तररफ से बनाया गया एक ओपन-सोर्स, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम है।
2019 में ही 23 सितंबर को गूगल ने सीसीआई को कोर्ट में खींचा और जांच से जुड़ी एक गोपनीय अंतरिम रिपोर्ट को लीक करने का आरोप लगाया। एक साल बाद CCI ने गूगल के खिलाफ एक अन्य जांच शुरू कर दी, जो इस बार प्ले स्टोर पर उसके पेमेंट सिस्टम से संबंधित थी।

2021 में कमीशन ने गूगल के खिलाफ भारत के स्मार्ट टेलीविजन मार्केट में एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम में अपने दबदबे को लेकर एक अन्य जांच शुरू करने का आदेश दिया।

स्टेकहोल्डर्स की समस्या

घरेलू एप्लीकेशंस और कंटेंट डिस्कवरी प्लेटफॉर्म इंडस ओएस (Indus OS) के कोफाउंडर राकेश देशमुख कई साल से गूगल की इन कथित एंटी कॉम्पीटिटिव प्रैक्टिसेज से जूझते रहे हैं। Indus OS की ओनरशिप अब फोनपे के पास है। देशमुख ने कहा, हमें एक दशक लंबे अनुभव से महसूस हुआ कि अगर गूगल सर्विसेज के साथ कॉम्पीटिशन को सुरक्षित करना है तो ओईएम (original equipment manufacturer) और सेकेंडरी एंड्रॉयड लेवल्स दोनों में बदलाव की जरूरत होगी। हम इस लड़ाई को लड़ते रहेंगे।

इकोसिस्टम की बाधाएं

काफी हद तक दूसरे ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर की तरह, दूसरे डेवलपर्स भी यूजर्स और हैंडसेट मैन्युफैक्चरर्स को वैकल्पिक ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराकर झटका दे सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, गूगल ने कई हथकंडों के जरिये इकोसिस्टम पर अपने कंट्रोल को बनाए रखा है। सीसीआई के आदेश में ऐसे आदेशों पर सहमति जताई गई है। आदेश के मुताबिक, गूगल ने मार्केट पर दबदबा बनाए रखने के लिए Android के अपने वर्जन को प्री-इंस्टाल करने के लिए डिवाइस मैन्यूफैक्चरर्स के साथ डील्स की हैं।

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इसके अलावा, उसने ऐप नोटिफिकेशन और लोकेशन सेवाओं जैसी सुविधाओं को एक्सेस करने से प्रतिबंधित कर दिया। इसका मतलब है कि यदि कोई डेवलपर एंड्रॉयड को टक्कर देने वाला एक वर्जन तैयार करता है तो वे अपने प्रोडक्ट्स तैयार करने के लिए सॉफ्टवेयर के मुख्य पार्ट्स तक एक्सेस हासिल नहीं कर सकते। अब एंटीट्रस्ट वाचडॉग ने आदेश में कहा कि Google ऐसे प्रमुख सॉफ्टवेयर ब्रिजेस तक पहुंच से इनकार नहीं कर सकता है जिससे ओईएम, ऐप डेवलपर्स और इसके मौजूदा या संभावित कॉम्पीटिटर्स को नुकसान पहुंचता है।

देशमुख ने कहा, इस आदेश के साथ हमारे ऐप को डिस्ट्रीब्यूट करने की ऐक्सेस अनलॉक हो जाएगी। हालांकि, गूगल ने अभी तक हमारे जैसों को काम का समान अवसर नहीं दिया है, क्योंकि वह थर्ड पार्टी ऐप्स के लिए यूजर्स को वार्निंग देती है जब वे ऐसे ऐप्स को डाउनलोड करते हैं।

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