Monday, February 26, 2024
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बजट से पहले निर्मला सीतारमण ने चेताया, जानिए क्या दी चेतावनी ?

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने गुरुवार 12 जनवरी को ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट (Voice of Global South Summit)’ नाम से आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्रियों के सत्र की अध्यक्षता की। इस दौरान निर्मला सीतरमण ने कहा कि विभिन्न देशों में बढ़ते कर्ज संकट को अगर नजरअंदाज किया जाता रहा तो, यह ग्लोबल लेवल पर मंदी की एक वजह बन सकता है। उन्होंने कहा, “अगर इन समस्याओं को बिना हल किए ही छोड़ दिया गया, तो यह बढ़ता कर्ज संकट पूरी दुनिया में मंदी ला सकता है और लाखों की संख्या में लोगों को गरीबी रेखा के नीचे भेज सकता है।”

वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कर्ज से जुड़ी असुरक्षा की स्थिति बढ़ रही है और यह एक व्यवस्थागत ग्लोबल कर्ज संकट का खतरा पैदा कर रही है। यह उन देशों में साफ तौर से देखा जा सकता है जो आज बाहरी कर्ज को चुकाने और भोजन व फ्यूल जैसी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के बीच में फंसी हुई हैं। ऐसे में विकास के सामाजिक आयाम और बढ़ते वित्तीय अंतर के विषय पर ध्यान देने की जरूरत है जिसका सामना कई देश कर रहे हैं।

सीतारमण ने कहा, “हमें ऐसे सिस्टम की संभावना तलाशनी चाहिए, जिससे मल्टीलेटर डेवलपमेंट बैंकों (MDB) की ओर से दिया जाने वाला समर्थन उस देश की जरूरतों के अनुरूप हो और टिकाऊ हो।”

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भारत विदेश नीति में नए प्रयोग के तहत पीएम मोदी की अगुआई में ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ’ नाम से एक वर्चुअल सम्मेलन कर रहा है, जिसमें करीब 120 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। ‘ग्लोबल साउथ’ मोटे तौर पर एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के विकासशील देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को कहा जाता है। इस सम्मेलन का थीम ‘एकता की आवाज, एकता का उद्देश्य’ है।

दो दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में कई कार्यक्रम और सत्र आयोजित किए जाएंगे। वित्त मंत्रियो के लिए आयोजित सत्र का थीम ‘लोगों पर केंद्रित विकास के लिए वित्तपोषण’ था, जिसके तहत डेवलपमेंट फाइनेंसिंग, विकास सहायता और साझेदारी, वित्तीय समावेशन और डिजिटल पब्लिक गुड्स सहित अन्य विषयों पर चर्चा हुई।

निर्मला सीतारमण ने इस मौके पर कहा, “भारत दशकों से ग्रांट, लेटर ऑफ क्रेडिट, ITEC पहल और तकनीकी परामर्श के जरिए अनगिनत क्षेत्रों में विकास के लिए सहयोग बढ़ाने के प्रयासों में आगे रहा है।” उन्होंने कहा, “हमारी डेवलपमेंट परियोजनाएं ग्लोबल साउथ के अन्य देशों में ज्ञान साझा करने और क्षमता निर्माण के लिए रोल मॉडल बन रही हैं।”

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